यूट्यूब से सीखा पैसा छापने का तरीका, 5 महीने में बाजार में सप्लाई किए 8 लाख के जाली नोट, पड़ोसियों को बताता था इवेंट आर्गेनाइजर हूंl
जाली नोट कारोबार में दबोचे गए सरगना बृजेश मौर्या ने यूट्यूब से छापने का तरीका सीखा था। ग्वालियर का रहने वाला बृजेश अनपढ़ है lऔर नकली नोटों के गोरखधंधे से लखपति बनना चाहता था। उसके साथ जयपुर का प्रथम शर्मा भी बुधवार को पकड़ा गया था। वह बृजेश का सहयोगी बताया जा रहा है। शुरुआती पूछताछ से पता चला है कि 5 महीनों में ही दोनों 8 लाख के नकली नोट बाजार में सप्लाई कर चुके हैं। दोनों फिलहाल एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की गिरफ्त में हैं।
बृजेश ने यूट्यूब चैनल के जरिए नकली नोट छापने के वीडियो देखे। उनके उपकरणों के बारे में जानकारी हासिल की। इसके बाद जयपुर शहर के बाजारों में अलग-अलग जगहों से हाई क्वालिटी के कलर प्रिंटर, लेमिनेशन मशीन व अन्य उपकरण खरीदे। अपने विला पर थोड़े से नोट छापकर बाजार में चलाया। ये नोट असली नोटों से इतने मिलते जुलते थे कि कोई पहचान नहीं सका। बस, यहीं से बृजेश की हिम्मत बढ़ गई। उसने नकली नोट छापने का काम तेज कर दिया। वे सिर्फ 200 और 500 रुपए के नोट ही छापते थे। यह काम ज्यादातर रात के वक्त ही करते थे। दिन में आराम करते थे और नोटों की डिलीवरी करते थे।
गोरखधंधे की कमाई से खरीदी 2 लग्जरी कार
एसओजी के मुताबिक बृजेश ने कमाई गई मोटी रकम से दो लग्जरी कार फाइनेंस कराई। एक दिल्ली और दूसरी कार दक्षिण भारत में रहने वाले किसी परिचित के माध्यम से ली है। बृजेश मुंबई में भी इवेंट व अन्य काम कर चुका था। वह जयपुर में बहुत लो प्रोफाइल होकर रहता था। नोटों की डिलीवरी के लिए कभी कार और कभी बाइक का उपयोग करता था।
घर से दूर नकली नोट की डिलीवरी
नकली नोट छापने का काम गोनेर रोड पर अपार्टमेंट में बने विला में होता था। यह महंगा विला एक बैंक ऑफिसर का है, जो मुंबई में पोस्टेट हैं। बृजेश ने OLX के जरिए यह मकान बैंक अफसर से करीब 10 हजार रुपए महीना किराए पर लिया था। इसके लिए विला के मालिक के परिचित के माध्यम से कागजी कार्रवाई पूरी की थी। मुंबई में होने से विला मालिक की बृजेश से ज्यादा बातचीत नहीं हो पाती थी। उनकी मुलाकात भी नहीं हुई। उसने किराएदार सत्यापन के लिए भी बृजेश को कहा था, लेकिन बृजेश टालमटोल करता रहा। आस पड़ोस वालों के पूछने पर वह खुद को इवेंट ऑर्गेनाइजर ही बताता था।
जयपुर के ग्रामीण क्षेत्रों, शेखावटी में सप्लाई, सोशल मीडिया से तय करते थे जगह
बृजेश नकली नोटों की डिलीवरी जयपुर के आसपास ग्रामीण क्षेत्रों व शेखावाटी के कस्बों में ज्यादातर करता था। नकली नोट सप्लाई करने वाली गैंग से पहले डिमांड लेकर एडवांस लेता था। फिर नकली नोट छापता था। वह एक लाख रुपए के नकली नोट देने के लिए 40 हजार रुपए असली के नोट वसूल करता था। डिमांड और डिलीवरी के लिए हमेशा मोबाइल फोन पर बातचीत की बजाय सोशल मीडिया एप के जरिए ही ऑनलाइन कॉलिंग का उपयोग करता था। ताकि पकड़ा न जा सके।
नागौर के 4 युवकों की गिरफ्तारी से हुआ पर्दाफाश, एसओजी पहुंची सरगना तक
यह कार्रवाई एडीजी अशोक राठौड़ के निर्देश पर डीआईजी शरत कविराज के सुपरविजन में पुलिस इंस्पेक्टर विजय कुमार रॉय के नेतृत्व में गठित टीम ने की। एसओजी ने 3 दिन पहले नागौर के रहने वाले 4 युवकों को जयपुर में टोंक रोड पर हरियाणा नंबर की कार में पकड़ा था। उनके पास एक लाख रुपए के नकली नोट बरामद हुए थे। वे चारों युवक 17 जुलाई तक रिमांड पर हैं। उनसे पूछताछ में बृजेश मौर्या का नाम सामने आया। तब पुलिस ने लगातार निगरानी कर 13 जुलाई की आधी रात को कार्रवाई की। गोनेर रोड पर विला में नकली नोट छाप रहे बृजेश व प्रथम शर्मा को पकड़ा गया था। उनके कब्जे से 5 लाख से ज्यादा के नकली नोट बरामद हुए थे।
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